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पढ़ते समय नींद पढ़ाई में नींद क्यों आती है study sleep problem नींद भगाने के उपाय पढ़ाई पर ध्यान कैसे लगाएं
कई छात्रों की सबसे बड़ी समस्या होती है कि जैसे ही वे किताब खोलते हैं, आंखें भारी होने लगती हैं। यह समस्या केवल आलस्य नहीं बल्कि दिमाग और शरीर से जुड़ी कई आदतों का नतीजा होती है।
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अगर आप रोज 7 से 8 घंटे की नींद नहीं लेते, तो पढ़ते समय दिमाग एक्टिव नहीं रह पाता।
एक ही विषय या सिर्फ किताब देखकर पढ़ना दिमाग को बोर कर देता है, जिससे नींद आने लगती है।
देर रात या खाने के तुरंत बाद पढ़ाई करने से शरीर रिलैक्स मोड में चला जाता है।
सोने से पहले मोबाइल देखने से दिमाग थक जाता है और पढ़ते समय नींद आने लगती है।
परीक्षा का डर या ज्यादा सोचने से दिमाग जल्दी थक जाता है।
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| समस्या | नुकसान |
|---|---|
| कम एकाग्रता | याद करने की क्षमता कम हो जाती है |
| समय की बर्बादी | पढ़ाई पूरी नहीं हो पाती |
| आत्मविश्वास कम | परीक्षा में डर बढ़ता है |
| रूटीन बिगड़ना | डेली स्टडी हैबिट खत्म हो जाती है |
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| समय | फायदा |
|---|---|
| सुबह 5 से 8 बजे | दिमाग सबसे ज्यादा एक्टिव |
| शाम 5 से 7 बजे | रिवीजन के लिए अच्छा |
| रात देर | नींद आने की संभावना ज्यादा |
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हां, लेकिन अगर रोज हो रहा है तो यह गलत रूटीन का संकेत है।
थोड़ी देर के लिए मदद मिलती है, लेकिन आदत बनाना सही नहीं।
अगर नींद पूरी हो और दिमाग फ्रेश हो तो ठीक है, वरना सुबह पढ़ना बेहतर है।