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सफलता की कहानी: NEET 2025 टॉपर - महेश पेशवानी

कहते हैं कुदरत ने इस ज़मीन पर सबको समान मौका दिया है। मौका मिलना एक बात है, उसे पहचानकर मेहनत से जीतना दूसरी - यही कहानी है महेश पेशवानी की।

शुरूआत का डर

जब महेश 11वीं क्लास में थे तो उनके मन में एक सवाल रहता था - “मैं हिंदी मीडियम का छात्र हूँ, अंग्रेज़ी मीडियम के छात्रों से कैसे मुकाबला करूँगा?” यह डर हर स्टूडेंट के अंदर कहीं न कहीं होता है।

रणनीति: भाषा को चुनौती बनाकर अवसर बनाया

महेश ने हार मानी नहीं। उन्होंने तय किया कि भाषा एक बाधा है तो उसे हटाना होगा। उन्होंने पढ़ाई हिंदी और इंग्लिश दोनों में शुरू की - दिन-रात मेहनत की, नोट्स बनाए, प्रश्न हल किए। धीरे-धीरे भाषा की दिक्कतें समाप्त हो गईं और एक दिन ऐसा आया जब भाषा अब कोई बाधा न रही।

सीख: सही रणनीति और मेहनत से भाषा की कमी कमजोरी नहीं रहती।

आत्मविश्वास और दिनचर्या

महेश पर खुद का भरोसा गहरा था। वे बिना किसी सख्त टाइमटेबल के रोज़ाना 6-7 घंटे नियमित पढ़ते - कभी दिन में, कभी रात में। उनका फोकस और discipline ही उनकी असली ताकत थी।

परिवार का योगदान

महेश के पिता रमेश पेशवानी जब Answer Key की खबर के समय सोच रहे थे कि उनका बेटा टॉप-10 में होगा, तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब पता चला - महेश ने All India Rank 1 हासिल किया। पिता की आँखों में खुशी के आँसू थे।

महेश की हाई-स्कूल रिपोर्ट भी शानदार रही (97%). उन्हें पढ़ने के लिए कभी कहने की जरूरत नहीं पड़ी — उन्होंने अपने पिता की मेहनत को देखा और खुद काम कर दिया।

सीख: माता-पिता का सपोर्ट और उनकी मेहनत को समझकर काम करना जीवन में बड़ी सफलता दिला देता है।

मुश्किलों के बीच की तैयारी

महेश ने सीकर के एक हॉस्टल में तीन साल तक रहकर फोकस्ड तैयारी की। उनके माता-पिता दोनों शिक्षक थे और उन्होंने महेश को हमेशा प्रेरित किया।

संक्षेप में: मुख्य सीख

  • हिंदी मीडियम होना बाधा नहीं - मेहनत और सही रणनीति मायने रखती है।
  • आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत सफलता की कुंजी हैं।
  • पिता-माँ का योगदान और उनके संघर्ष को समझना प्रेरणा देता है।
  • लक्ष्य के लिए निर्बाध समर्पण (3 साल का समर्पण) बड़ा अंतर लाता है।
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